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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले ...

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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले ...

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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले ...

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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले के निर्माण के पूर्व इस नगर का नाम बलवन्त नगर था । राजधारी ओरछा से इस किले के झॉंई सी (धॅुधला) दिखाई देने के कारण इसका नाम झाईसी और कालान्तर में झॉंसी हो गया। किले के निर्माण में स्थानी महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से घिर जाने को बाद किले की प्राचीर से कूद कर बाहर चली गयी थी। आज भी इस स्थान को जम्पिंग स्पाट के नाम से जाना जाता है। किले में गणेश मन्दिर, शिवालय, पंचमहल, फाँसीघर, रानी का उद्यान, कड़क बिजली तोप, रानी के तोपची गुलाम गौस खाँ की समाधि आदि दर्शनीय हैं।

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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले के निर्माण के पूर्व इस नगर का नाम बलवन्त नगर था । राजधारी ओरछा से इस किले के झॉंई सी (धॅुधला) दिखाई देने के कारण इसका नाम झाईसी और कालान्तर में झॉंसी हो गया। किले के निर्माण में स्थानी महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से घिर जाने को बाद किले की प्राचीर से कूद कर बाहर चली गयी थी। आज भी इस स्थान को जम्पिंग स्पाट के नाम से जाना जाता है। किले में गणेश मन्दिर, शिवालय, पंचमहल, फाँसीघर, रानी का उद्यान, कड़क बिजली तोप, रानी के तोपची गुलाम गौस खाँ की समाधि आदि दर्शनीय हैं।

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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले के निर्माण के पूर्व इस नगर का नाम बलवन्त नगर था । राजधारी ओरछा से इस किले के झॉंई सी (धॅुधला) दिखाई देने के कारण इसका नाम झाईसी और कालान्तर में झॉंसी हो गया। किले के निर्माण में स्थानी महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से घिर जाने को बाद किले की प्राचीर से कूद कर बाहर चली गयी थी। आज भी इस स्थान को जम्पिंग स्पाट के नाम से जाना जाता है। किले में गणेश मन्दिर, शिवालय, पंचमहल, फाँसीघर, रानी का उद्यान, कड़क बिजली तोप, रानी के तोपची गुलाम गौस खाँ की समाधि आदि दर्शनीय हैं।

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झॉंसी नगर के मध्य भाग में बॅंगरा नामक पहाड़ी पर यह किला निर्मित है। इसका निर्माण ओरछा के बुन्देला राजा वीर सिंह जू देव ने 1613 ई0 में कराया था। किले के निर्माण के पूर्व इस नगर का नाम बलवन्त नगर था । राजधारी ओरछा से इस किले के झॉंई सी (धॅुधला) दिखाई देने के कारण इसका नाम झाईसी और कालान्तर में झॉंसी हो गया। किले के निर्माण में स्थानी महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से घिर जाने को बाद किले की प्राचीर से कूद कर बाहर चली गयी थी। आज भी इस स्थान को जम्पिंग स्पाट के नाम से जाना जाता है। किले में गणेश मन्दिर, शिवालय, पंचमहल, फाँसीघर, रानी का उद्यान, कड़क बिजली तोप, रानी के तोपची गुलाम गौस खाँ की समाधि आदि दर्शनीय हैं।

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  • नगर निगम, इलाइट चौराहा के पास,
  • सिविल लाइंस, झांसी (उत्तर प्रदेश)
  • पिन कोड : 284001
  • ई-मेल : jhansismartcityltd@gmail.com

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